शीलं परम भूषणं का हिंदी अर्थ

Sheelam param bhushanam meaning in hindi नमस्कार दोस्तों, हम अक्सर इस श्लोक के बारे में कई बड़े – बड़े अधिकारी के मुह से सुनते हैं शीलम परम भूषणम यह श्लोक वैसे तो काफी अच्छा हैं। क्या आपको पता हैं की देश की सबसे बड़ी सेवा यानी सिविल सेवा की परीक्षा पास करने के बाद जब अभियार्थी IAS की ट्रेनिंग लेने LBSNAA जाते हैं तो उस संस्थान के प्रवेश दुवार पर एक श्लोक यही लिखा होता हैं।

क्या आपको इस श्लोक का मतलब पता हैं ? अगर आपको इसके बारे में नही पता हैं तप आपको इस लेख के माध्यम से इसी के बारे में बताने का प्रयास किया जायेगा। तो आप इस लेख को अंत तक पढ़े ताकि आपको इसके sheelam param bhushanam के हिंदी अर्थ और इसके मतलब के बारे में पता चल सके। 

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Sheelam param bhushanam meaning in hindi

यदि आपको शीलम परम भूषणम से संबंधित जानकारी लेनी है तो आपका हमारे इस पेज पर स्वागत है हम आपको शीलम परम भूषणम से संबंधित संपूर्ण जानकारियों से रूबरू करवाएंगे-

शीलम परम भूषणम भारतीय संस्कृति और परंपरा की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षाओं में से एक है। शीलम का अर्थ है चरित्र, परम का अर्थ है उच्चतम या सर्वोत्तम, और भूषणम का अर्थ है आभूषण। 

संस्कृत भाषा में इस वाक्यांश का अर्थ है कि “चरित्र ही सर्वोच्च गुण” है यह हमारे को एक सामान्य वाक्यांश की तरह लग रहा है लेकिन यह वाक्यांश भारत और भारतीय संस्कृति में एक अपने आप में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

हिंदुस्तान की भारतीय संस्कृति और इतिहास दार्शनिक और लोगों की प्रथाओं से भरपूर भरे हुए हैं जिन्होंने हिंदुस्तान को उस मुकाम पर पहुंचाया है जहां पर आज वह स्वयं पहुंच गया है। 

भारतीय लेखकों ने प्राचीन काल के व्यक्तियों और उनकी शिक्षकों को इस तरह से प्रस्तुत किया है जैसे कि योग शिक्षा और सिविल सेवाओं में किया है उन्होंने अपने भारत का बेहतर भविष्य बनाने के लिए और भविष्य को लगातार बढ़ाने के लिए भारत की प्राचीन भाषा संस्कृत की विविध शिक्षाओं का इसमें भरपूर उपयोग किया है।

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शीलम परम भूषणम का शाब्दिक अर्थ

 शीलम परम भूषणम कॉल और आधुनिक वैज्ञानिक भाषा संस्कृत में लिखित एक महान कविता यश्लोक है जिसका शाब्दिक अर्थ है यह केवल एक नाम मात्र जब के लिए नहीं है बल्कि हमारे दैनिक जीवन सरिया में इस शिलांग का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है जिससे हर व्यक्ति को अपने आप में इसे समाहित करना चाहिए इस सप्त का अर्थ है कि मनुष्य को अपने उद्देश्य के लिए लगातार संघर्ष करते रहना चाहिए और अपने चरित्र को कभी भी खराब नहीं होने देना चाहिए।

इसका अर्थ यह भी है कि बेहतर शासन के लिए सिविल सेवकों में उत्कृष्ट गुण पैदा करना और नैतिक और सामाजिक मूल्यों के साथ कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना।

गुण उत्कृष्ट होने चाहिए तथा साथ ही उन्हें सामाजिक और नैतिक मूल्यों को समझना चाहिए जो कि एक धीरे-धीरे कल्याणकारी राज्य और समाज की स्थापना कर सकें।

सभी बुद्धिजीवियों को पता है कि शीलम परम भूषणम एक संस्कृत का शब्द है और यह शब्द होने के साथ-साथ एक संस्कृत का श्लोक ही है जिसे शास्त्रों के माध्यम से कई आध्यात्मिक गुरु ने हमें अपने जीवन को जीने का तरीका बताया है और लोगों को कल्याण की भावना से प्रेरित किया है इस शब्द में बताया गया है कि सभी तीन मनुष्य का सर्वोच्च गुण है।

कोई भी मनुष्य किसी भी चलो क्या श्लोक का शाब्दिक अर्थ या जप करने से ही वह इसे समझ नहीं सकता बल्कि इसे गहनता से अध्ययन करने की जरूरत है जो मनुष्य इस चलो की गहनता से जितनी अधिक खोज करेगा उसका ज्ञान उतना ही बढ़ेगा। 

बौद्ध ग्रंथ यानी कि सभी पाली भाषा में लिखे गए हैं पाली भाषा में चिलम का अर्थ होता है शीला और इसका हिंदी में अर्थ होता है नैतिकता मानव के सामाजिक मूल्यों को लोगों के सामने परिभाषित करते हुए शीला एक ऐसा गुण है जिसे लोगों के माध्यम से सर्वोच्च महत्व दिया जाता है।

शीलम् का अर्थ

शीलम् का अर्थ होता है कि व्यक्ति को हमेशा सहनशील बनना चाहिए और लोगों पर कभी भी गुस्सा नहीं करना चाहिए क्योंकि हमें सीलम हमें यही सिखाता है कि हमेशा व्यक्ति को सहनशील होना चाहिए।

समाधि का अर्थ

समाधि का अर्थ यह है कि व्यक्ति को ज्ञान प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जाना चाहिए और अपने ध्यान को एकाग्र रखते हुए उस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए कठोर परिश्रम करनी चाहिए।

प्रज्ञा का अर्थ

 प्रज्ञा का अर्थ है कि व्यक्ति को हमेशा अपने द्वारा की गई प्रतिज्ञा या शपथ पर हमेशा कायम रहना चाहिए और हमेशा सच्चे और चेतन मन से अपने कार्य के प्रति निष्ठावान होना चाहिए।

सभी घटक-सिला, समाधि, और प्रज्ञा आपस में जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और कारण और प्रभाव प्रमेय पर आधारित हैं।

एक दूसरों को प्रभावी और गुणात्मक होने के लिए प्रेरित करता है। यदि कोई शील और समाधि का पालन करता है, तो इससे प्रत्यक्ष ज्ञान की प्राप्ति होती है।

एक सिविल सेवक या सिविल सेवा के इच्छुक व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व में कोई स्वार्थी विचार न रखते हुए एक पवित्र और प्रबुद्ध चरित्र प्राप्त करने के लिए समर्पित होना चाहिए।

सेवक या आकांक्षी को इस श्लोक के माध्यम से एक बेहतर व्यक्ति बनने का लक्ष्य रखना चाहिए, चाहे वह व्यक्तिगत हो या पेशेवर, अपने देश के सर्वोत्तम पक्ष में प्रत्येक कर्तव्य को निभाने के लिए।

शीलम परम भूषणम  विचारधारा

शीलम परम भूषणम की विचारधारा एक प्रबुद्ध, भगवान बुद्ध की विचारधारा के साथ प्रतिध्वनित होती है।

बुद्ध की पाँच मुख्य नैतिकताएँ जो एक निस्वार्थ व्यक्तित्व के निर्माण की ओर इशारा करती थीं, वे ही शीलम परम भूषणम के आदर्श वाक्य का उद्देश्य हैं।

इस श्लोक के सही अर्थ को समझने के लिए, जीवन में निम्नलिखित पांच सिद्धांतों को सीखना और लागू करना आवश्यक है। 

अहिंसा – किसी भी परिस्थिति में पृथ्वी पर किसी भी जीवित प्राणी को कभी भी शारीरिक या मनोवैज्ञानिक नुकसान न पहुंचाएं।

अस्तेय – किसी से छीनने के लिए नहीं, जो देने का इरादा नहीं है। किसी के कब्जे से कुछ भी चोरी न करें।

ब्रह्मचर्य – कभी भी किसी भी यौन दुराचार का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। बुद्ध, हालांकि, कभी-कभी ब्रह्मचर्य का पालन करने का निर्देश देते हैं, लेकिन सिविल सेवाओं की मांग यह नहीं है। हालांकि, हर स्थिति में अपराध से दूर रहना चाहिए।

सत्य या सत्य – अपने बारे में या किसी और के बारे में कोई गलत जानकारी नहीं देना। नुकसान के इरादे के साथ या बिना।

मादक पेय पदार्थों से एक सुरक्षित सीमा के भीतर रहें और नशे के कारण किसी भी तरह का दुराचार न करें। हालाँकि, बुद्ध को शराब से दूर रहने के सख्त निर्देश हैं ।

इस प्रकार, शीलम परम भूषणम की विचारधारा को तोड़ने के बाद हम सीखते हैं कि शीलम का अर्थ है अच्छे नैतिकता और मूल्यों का चरित्र। अन्य दो शब्द परम और भूषणम सिखाते हैं कि कोई भी आभूषण आपके शुद्ध चरित्र से बेहतर नहीं है।

निष्कर्ष-

हमारे द्वारा दी गई Sheelam param bhushanam meaning in hindi और शीलं परम भूषणम विचारधारा पर जानकारी आपको कैसी लगी यदि अच्छी लगी हो तो कृपया कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बताइए यदि आपको शीलम परम भूषणम से संबंधित कोई भी क्वेश्चन पूछना है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं हम आपके सभी क्वेश्चन का उत्तर देने की पूर्ण कोशिश करेंगे।

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