दुनिया के 7 अजूबो की जानकारी

Duniya ke ajoobe नमस्कार दोस्तों, हम इस बात से तो वाकिफ हैं की दुनिया में कई सारी ऐसी जगह हैं जो संस्कृति और सामाजिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं. वैसे क्या आप जानते हैं की दुनिया के 7 अजूबे कौनसे हैं ? अगर आप इसके बारे में नहीं जानते हैं तो आपको इस लेख के माध्यम से पूरी जानकारी दी जा रही हैं. 

दुनिया के 7 अजूबे कौनसे हैं ? | Duniya ke ajoobe

यह हैं वो दुनिया के 7 अजूबे जो अपनी संस्कृति और सुन्दरता के लिए जाने जाते हैं. इन 7 अजूबो की सूची कुछ इस प्रकार हैं. दुनिया के सात अजूबों में ताजमहल , कलिजियम चिचेन इत्जा, माचू पिच्छ , क्राइस्ट द रिमिटर पेट्र और चीन की महान दीवार आदि सम्मिलित है तथा इसके साथ साथ ही मिस्र के पिरामिड को इसका एक आठवां भाग माना जाता है लेकिन उसको अभी तक एक मानक दर्जा नहीं दिया गया है।

ताज महल

संपूर्ण दुनिया में भारत का ताजमहल अपनी खूबसूरती के कारण सब को अपनी और आकर्षित करता है तथा इसके साथ साथ ही इसकी वास्तुकला और इसका इतिहास और इसको बनाने के पीछे की प्रेम कहानी के बारे में लोग सुनकर बहुत ही आश्चर्यचकित होते हैं. 

क्योंकि ताजमहल को एक प्रेम कहानी के द्वारा मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनाया था और इस मकबरे के अलावा यहां पर शाहजहां का मकबरा भी है लेकिन देखने लायक चीज यह है कि यहां की वास्तुकला बहुत ही अलग है. 

जो कि विश्व की अन्य इमारतों से इसे अलग बनाती है तथा साथ साथ ही इसे विश्व धरोहर में शामिल कर लिया गया है और इसका रखरखाव उत्तर प्रदेश सरकार के पास होने के कारण भी लोग इसे दूर दूर से देखने आते हैं। ताजमहल को देखने विदेशी पर्यटक भी आते हैं जो कि इसकी खूबसूरती को निहारते हैं। 

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कालीज़ीयम

फ्लेवियन एम्फीथिएटर के रूप में भी जाना जाता है।  कोलोसियम एक अंडाकार आकार का एम्फीथिएटर है जो इटली में रोम के केंद्र में स्थित है। कंक्रीट और रेत से निर्मित किया गया है। इसका निर्माण 72 वी शताब्दी में सम्राट वेस्पासीएम ने इसका निर्माण शुरू किया था। 

और इस इमारत का पूरा निर्माण वेस्पासीएस के उत्तराधिकारी टाइटस में 80 शताब्दी में पूरा किया था यह दुनिया का एकमात्र सबसे बड़ा एमपी थिएटर है। इसमें लगभग 70 से 80 हजार दर्शक एक साथ बैठ सकते हैं यह इसकी क्षमता है।

इसका उपयोग सामान्यता यहां पर होने वाली प्रतियोगिताओं में किया जाता है जिसमें कि यहां पर जानवरों का शिकार किया जाता है और यहां पर नाटक का भी आयोजन किया जाता है।

माचू पिचू

माचू पिच्छू पेरू देश के पूर्वी कॉर्डिलेरा में एक पहाड़ी पर स्थित है इस पहाड़ी की ऊंचाई लगभग 7970 फीट है माचू पिच्छू का निर्माण 15 वी शताब्दी के लगभग किया गया था। माचू पिचू इका सभ्यता का एक प्रतीक माना जाता है।

माचू पिच्छू के बारे में अधिकांश इतिहासकारों का मानना है कि इस इमारत का निर्माण सन 1450 के आसपास एक का सम्राट पंचकुटी के लिए एक अपनी निजी संपत्ति के रूप में किया गया था।

लेकिन धीरे धीरे स्पेनिश विजय के समय इसे छोड़ दिया गया था स्पेनिश को इस सभ्यता के बारे में कोई जानकारी नहीं थी इस एक्का सभ्यता की खोज अमेरिका के इतिहासकार हीराराम भिघम द्वारा खोजा गया था संग 1983 के आसपास यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर में शामिल कर लिया था। 

उद्धारक येशु

ब्राजील में उद्धारक येशु एक बहुत ही प्रसिद्ध क्राइस्ट द रिमिटर जीसस क्राइस्ट की एक प्रतीकात्मक डे को प्रतिमा है इस प्रतिमा की बनावट फ्रांसीसी मूर्तिकार ओल्ड लेडी व्हिस्की द्वारा बनाया गया था. 

इस प्रतिमा को बनाने में फ्रांसीसी इंजीनियर अल्बर्ट के कोट के साथ काम कर रहे हैं इसी योगी ब्राजील के इंजीनियर रेट दा सिल्वा कोस्टा द्वारा बनाया गया था यह मुख्यतः रोमानियाई मूर्तिकार का एक फैशन का चेहरा था।

इसका निर्माण प्रबलित कंक्रीट और सोपस्टोन से किया गया था। इसका वजन 635 मीट्रिक टन है और यह रियो डी जनेरियो शहर को देखने वाले तिजुका वन राष्ट्रीय उद्यान में 700 मीटर के कोरकोवाडो पर्वत की चोटी पर स्थित है। निर्माण 1922 में शुरू हुआ और यह 1931 में पूरा हुआ। 

चिचेन इत्जा

चिचेन इट्ज़ा मेक्सिको के पास स्थित  टिनम नगर पालिका में स्थित एक पुरातात्विक स्थल है। चिचेन इत्जा यहां पर बहुत ही प्रसिद्ध स्मारक है जो कि यहां के लोगों को एक बहुत ही अच्छा एहसास दिलाता है। यह पूर्व में कोलंबियाई देश था। यह माया लोगों द्वारा निर्मित एक बड़ा पूर्व-कोलंबियाई शहर था। 

और सामान्यतः पौराणिक महान शहरों में से एक था। चीचेन तजा सामान्यतः मेक्सिको में सबसे अधिक देखे जाने वाली एक पुरातात्विक स्थलों में से एक मानी जाती है।  इसमें एल काराकोल या चिचेन इट्ज़ा की वेधशाला, योद्धाओं का मंदिर, ग्रैंड बॉलकोर्ट, वीनस प्लेटफ़ॉर्म और अन्य जैसी इमारतें शामिल हैं। इसे 1988 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किया गया था। 

पेट्रा

मूल रूप से अपने निवासियों के लिए रकमू के रूप में जाना जाता है। पेट्रा दक्षिणी जॉर्डन देश का एक सबसे अधिक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल और शहर है ऐसा कहा जाता है कि पेट्रा के आसपास का क्षेत्रफल लगभग 7000 ईसा पूर्व में यहां पर बसाया गया था। पेट्रो नामक पुरातात्विक स्थल से शहर तक पहुंच 1.2 किलोमीटर लंबी घाटी के माध्यम से है जिसे सीक कहा जाता है। 

जो सीधे खज़नेह की ओर जाता है। 1812 में जोहान लुडविग बर्कहार्ट ने इसे फिर से खोजा जब तक यह दुनिया के लिए अज्ञात रहा। पेट्रा को उस पत्थर के रंग के कारण रोज सिटी भी कहा जाता है जिससे इसे तराशा गया है। इसकी रॉक-कट वास्तुकला और पानी की नाली प्रणाली बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करती है और यह 1985 से यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल रही है। 

चीन की महान दीवार

चीन की महान दीवार का निर्माण अपने देश की सीमा को सुरक्षित करने के लिए करवाया गया था जैसा कि हमें इसके नाम से ही पता चलता है कि चीन की महान दीवार मतलब कि चीन की सबसे बड़ी दीवार और दुनिया की सबसे बड़ी दीवार इसका मुख्य कारण यह था कि चीन देश अन्य देशों से अपनी सुरक्षा करना चाहता था। 

चीन की महान दीवार का निर्माण सातवीं शताब्दी में करवाया गया था लेकिन इसके सबसे प्रसिद्ध मिग राजवंश के द्वारा बनाए गए थे। चीन की महान दीवार की लंबाई एक 21196 किलोमीटर के लगभग है और इसे सन 1987 में यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल कर लिया गया था और यहां पर हर वर्ष लगभग कई लाख पर्यटक इसकी खूबसूरती को निहारने आते हैं तथा इस कलात्मक दीवार को देखने आते हैं।

यह थी कुछ जानकारी Duniya ke ajoobe के बारे में. उम्मीद करते हैं आपको थ जानकारी पसंद आई होगी.

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