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गिलोय का काढ़ा कैसे बनाये ?

Giloy ka kadha kaise banaye नमस्कार दोस्तों, वर्तमान में बीमारियों का खौफ काफी तेजी से बढ़ रहा हैं. ऐसी ही बीमारी की सूची में जैसे डेंगू, कोरोना इतियादी. बीमारी के समय में अक्सर ऐसा देखने को मिलता हैं की शरीर में थकान बढ़ने लगती हैं और शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता शरीर से ख़त्म होने लगती हैं. 

ऐसे में इस वर्धक क्षमताओं को बढाने के लिए कई देशी उपचार करते हैं. ऐसी ही एक देसी बीमारी के तौर पर हम अक्सर गिलोय का इस्तेमाल करते हैं. गिलोय एक जडीबुटी हैं जिसका इस्तेमाल करने के लिए डॉक्टर भी सलाह देते हैं. 

तो आज हम हमारे इस लेख में इसी के बारे में बताने जा रहे हैं की आप किस प्रकार से इस गिलोय का रस या काढ़ा बना सकते हैं और अपने शरीर को स्वास्थ्य रख सकते हैं.

गिलोय के काढ़े के फायदे और बनाने का तरीका

गिलोय एक आयुर्वेदिक वनस्पति बेल है जिसके आयुर्वेद में बहुत से फायदे बताए गए है । कोरोना वायरस के प्रकोप के समय में कई लोगोने अपनी रोग-प्रतिकार क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक और हर्बल दवाओं की और रुख किया । इन्हीं दवाओं में गिलोय भी एक है । अकसर लोगों का ध्यान गिलोय के तरफ तब खिचा जब आयुष मंत्रालय ने इसके इस्तेमाल की सलाह दी ।

गिलोय के फायदे सुनकर आप को भी लगेगा की इसका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए । लेकिन कई सवाल भी आप के मन में खड़े होंगे, जैसे की गिलोय को कैसे इस्तेमाल करें ? गिलोय का काढ़ा कैसे बनाये ? और इसके क्या फायदे है । आज इस पोस्ट में हम इन सवालों के जवाब जान ने की कोशिश करेंगे ।

गिलोय क्या है ?

गिलोय एक वनस्पति बेल है जो अकसर दूसरे पेड़ों के सहारे ऊपर की और बढ़ती है । यह सदाबहार हरित रंग की होती है । इसके पत्ते खाने के पान की तरह दिल के आकार के होते है । इसके पत्ते और डंडियों (लकड़ी) में औषधि गुण होते है । इसका सेवन ज्यादातर बुखार, एनीमिया, पीलिया, गठिया और मधुमेह जैसे बीमारियों में रोग प्रतिकार क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है ।

गिलोय का दूसरा नाम अमृता और गुडूची है । यह आसानी से उपलब्ध होती है । पतंजलि जैसे ब्रांड इसकी घनवटी टैबलेट बनाकर बेचते है । गिलोय के कई प्रमाणित फायदे है । आप इसे अपने बागीचे में लगा सकते है और कई तरह से इसका इस्तेमाल कर सेहत मंद रह सकते है ।

गिलोय का काढ़ा क्या होता है ?

गिलोय के डंडियों को अन्य आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के साथ उबाल कर बनाए गए अर्क को गिलोय काढ़ा कहते है । गिलोय के काढ़े में हल्दी, तुलसी, अदरक और स्वाद के लिए गुड डाला जाता है । याद रहे सही मात्र और विधि का इस्तेमाल कर ही असरदार काढ़ा बनाया जा सकता है ।

गिलोय का काढ़ा हरे रंग का बनता है। गिलोय का स्वाद कड़वा और तीखा होता है लेकिन काढ़े में  मिलाए हुए अन्य चीजों का स्वाद काढ़े में आ जाता है । गिलोय के पत्ते उबाल कर भी काढ़ा बनाया जा सकता है । गिलोय के सूखे हुए लकड़ी के पाउडर से भी कुछ विधि में काढ़ा बनाया जाता है ।

गिलोय का काढ़ा कैसे बनाये?

गिलोय का काढ़ा बनाने के लिए सबसे पहले जरूरी सामग्री जमा कर ले । इसमें गिलोय के 4-5 इंच के पाँच टुकड़े, एक चम्मच हल्दी, एक दो अदरक के टुकड़े, तुलसी के पत्ते, स्वाद के लिए गुड और दो कप पानी ले ले ।

  •  सबसे पहले किसी बर्तन में 2 कप पानी को उबालने के लिए रखे ।
  • अब इसमें बाकी सब जमा की हुई सामग्री डाल दे ।
  • अब मिश्रण को धीमी आंच पर कुछ देर पकने दे ।
  • जब पानी सुखकर आधा रह जाए तो गैस को बंद कर दे ।
  • अब बचे हुए एक कप काढ़े को छानकर पी ले ।

गिलोय का काढ़ा कब और कितना पीना चाहिए ?

गिलोय का काढ़ा सुबह खाली पेट पीना चाहिए । ध्यान रहे एक बार में एक कप से ज्यादा काढ़ा ना पिए । इसका ज्यादा सेवन करने से ऑटो-इम्यून जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है । खास कर इसे बुखार में पीना चाहिए । गिलोय का काढ़ा जरूरत के मुताबिक कुछ दिनों तक पीना चाहिए । फिर आप इसमें ब्रेक ले सकते है । गर्भवती और बच्चों को इसे पिलाने से पहले चिकित्सक की सलाह ले । पीने पर अगर कोई भी साइड इफेक्ट दिखाई दे तो तुरंत इसका सेवन रोक दे और डॉक्टर से सलाह ले ।

गिलोय का काढ़ा पीने के फायदे

  • गिलोय का काढ़ा व्हाइरल, डेंग्यू जैसे बुखार में पीने से तबीयत जल्द सुधारने में मददगार है ।
  • गिलोय पीने से हमारे इम्यून सिस्टम (रोग-प्रतिकार क्षमता) में वृद्धि होती है, और कई तरह के संक्रमण से बचने में मदद हासिल होती है ।
  • आयुर्वेद में गिलोय को मधुमेह (डायबेटिस) को कंट्रोल में रखने के लिए इस्तेमाल करने के सलाह दी  गई है ।
  • एनीमिया और पीलिया में भी गिलोय का काढ़ा असरदार होता है । 
  •  यह पाचन तंत्र में सुधार लाता है और भूख को बढ़ाता है ।

निष्कर्ष

इस लेख में आपको Giloy ka kadha kaise banaye के बारे में बताया गया हैं. गिलोय का काढ़ा आयुर्वेदिक वनस्पति से बना हुआ होने की वजह से इसमें फायदे बहुत ज्यादा और नुकसान ना के बराबर होता है । सही मात्रा और चिकित्सक के परामर्श से इसका सेवन करने से कई  बीमारियों और परेशानियों में हमें राहत मिल सकती है ।