पानीपत की लड़ाई कब हुई थी ?

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Panipat ki ladai यदि आपको पानीपत के युद्ध के बारे में जानकारी प्राप्त करनी है तो आप लगातार हमारे पेज पर बने रहिए। हम आपको पानीपत के युद्ध से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्रदान करने की कोशिश करेंगे आइए तो अब हम बात करते हैं कि पानीपत का युद्ध कब क्यों और कैसे हुआ?

पानीपत का युद्ध कब हुआ? | Panipat ki ladai

पानीपत का युद्ध पहली बार मुख्यतः मुगल सम्राट बाबर और लोदी सम्राट महमूद लोदी के मध्य लड़ा गया था।

पानीपत का पहला युद्ध सन 1526 को हुआ था।

तैमूर वंशज के बाबर जब 12 साल का था तो वह एक शरणार्थी के रूप में जीवन जी रहा था। बाबर ने सन 1494 में वापस अपने गृह नगर को जीतने आया और इस समय उज्बेक्स ने समरकंद पर कब्जा कर लिया था। 

बाबर ने समरकंद को जीतने के लिए अपनी शक्तियों को का प्रयोग किया लेकिन बाबर को सफलता नहीं मिली और वह अफगानिस्तान चला गया था। सन 1504 में मुगल बादशाह  बाबर ने अफगानिस्तान में काबुल पर कब्जा कर लिया और वहां का शासक बन गया था।

बाबर काबुल का शासक रहते हुए भारत में पंजाब की तरफ से हमला करता रहता था। जब मुगल सम्राट बाबर अफगानिस्तान पर राज कर रहा था उस समय दिल्ली में लोदी वंश का शासन था और वहां पर इब्राहिम लोदी को समय राज कर रहे थे।

इब्राहिम लोदी दिल्ली का एक बहुत ही सनकी और विभाजन कारी शासक था। इब्राहिम लोदी ने ही पहली बार बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था। जब इब्राहिम लोदी ने बाबर को आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया तो बाबर को इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई देगी और वह पहले अपनी सेना को सुदृढ़ करने में लग गया। 

कहा जाता है कि मुगल सम्राट बाबर ने ही पहली बार बारूद के हथियारों का उपयोग किया था। बाबर ने ही पहली बार तुगलकनामा युद्ध पद्धति का उपयोग किया था। मुगल सम्राट बाबर ने सन 1525 को दिल्ली पर आक्रमण करने की योजना बना ली। बाबर ने 12 अप्रैल 15 से 26 को दिल्ली पर एक विशाल सेना के साथ आक्रमण किया जिसमें लगभग 100000 सैनिक और 1000 हाथी थे। इस युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व  स्वयं बाबर ने ही किया था। बाप ने पानीपत के प्रथम युद्ध में पहली बार बारूद की तोपों का इस्तेमाल किया था। 

पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को मुगल सम्राट बाबर ने हरा दिया और दिल्ली में मुगल साम्राज्य की स्थापना कर दी थी। इस युद्ध में लोदी वंश का सम्राट इब्राहिम लोदी युद्ध करते हुए मारा गया था। इस जीत के पश्चात बाबर अब न केवल हिंदुस्तान का एक शासक था बल्कि दिल्ली सल्तनत के सभी दरवाजे बाबर के लिए भूल गए थे। इसके पश्चात बाबर ने दिल्ली में मुगल साम्राज्य की स्थापना कर दी थी। Panipat ki ladai

पानीपत का दूसरा युद्ध?

सन 1530 में मुगल शासक बाबर की मृत्यु हो गई थी और इसके पश्चात धीरे-धीरे समय बीतता गया और बाबर के पोते सम्राट अकबर ने दिल्ली में मुगल साम्राज्य की गद्दी संभाली थी।

पानीपत की दूसरी लड़ाई मुख्यत: अकबर और हेमू के मध्य हुई थी। हेमू एक शक्तिशाली हिंदू शासक था और हेमू पर अकबर ने एक महत्वपूर्ण जीत दर्ज की थी।

सन 1540 में शेरशाह सूरी ने दिल्ली पर आक्रमण करके हुमायूं से दिल्ली छीन ली और हुमायूं को गंभीर असफलताओं से जूझना पड़ा था।

जब शेर शाह सूरी ने दिल्ली पर आक्रमण किया था उस समय अकबर की उम्र लगभग 15 वर्ष की थी और हुमायूं अपने साम्राज्य को छोड़कर दक्षिण की तरफ चला गया था। अकबर के क्षेत्र के पूर्व में सूरी जनरल हेमू ने खुद को एक मजबूत शासक के रूप में स्थापित किया और खुद को वहां का सम्राट बताते हुए उसने बंगाल में एक शक्तिशाली साम्राज्य स्थापित किया। 

इस समय मुगल सम्राट अकबर की आयु लगभग 13 वर्ष के आसपास थी और उन्होंने अपने साम्राज्य को वापस पाने के लिए पूरे खतरों से लड़ने के लिए एक सेना इकट्ठे कर ली थी। अकबर का इस समय लालन पोषण बैरम खान के पास था और इसी समय हेमू ने अपनी अजय गति को और बढ़ा दी थी।

5 नवंबर 1556 को पानीपत की दूसरी लड़ाई को लड़ा गया था और इसमें हेमू के हाथी मुगल सैनिकों के संकल्प को तोड़ने में सफल रहे लेकिन एक प्रेरक व्यक्ति के रूप में हेमू ने सामने से नेतृत्व किया हेमू इस युद्ध में एक ऊंचे हाथी पर बैठे थे. 

जोकि हेमू के सैनिकों के लिए एक महत्वपूर्ण ताबीज था और वह अपनी मुगल दुश्मनों के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य था शुरू में उन्होंने किसी लाभ के उन पर बाणों की बौछार की लेकिन हेमू ने इतना अधिक कठोर कवच पहन रखा था कि मुगल सेना के बाद उनके कवच को भी नहीं भेज सके लेकिन कहा जाता है कि सबसे लास्ट में एक तीर हेमू की आंख में लग गया जिसके कारण हेमू हाथी से नीचे गिर गया था और उसको मुगल सैनिकों ने मार डाला था और अपने सम्राट की मृत्यु को देखकर हिंदू सैनिक वहां से भाग गए थे।  Panipat ki ladai

पानीपत का तीसरा युद्ध?

पानीपत का तीसरा युद्ध 14 जनवरी 1761 को अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली और मराठों के बीच लड़ा गया था।

इस युद्ध में मराठा यह चाहते थे कि वह हिंदुस्तान से सदा के लिए मुगलों का साम्राज्य उखाड़ फेंक देना चाहते थे। इस युद्ध में मराठा पेशवा सदाशिव राव भाऊ थे।

मुगल सम्राट औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात मुगल साम्राज्य पतन की ओर अग्रसर होता चला गया था और अहमद शाह दुर्रानी द्वारा शासित अफगान दुर्रानी साम्राज्य को धमकी देते हुए मराठा साम्राज्य तेजी से विस्तार करता चला गया था. 

लेकिन अहमद शाह अब्दाली ने जिहाद की घोषणा की और एक बड़े अभियान की और कुछ किया था। अहमद शाह अब्दाली ने पंजाब के एक बड़े हिस्से पर अपना कब्जा कर लिया था और इसी का प्रतिशोध लेने के लिए मराठा शासक सदाशिव राव भाऊ ने अहमद शाह अब्दाली पर आक्रमण करने की सोची थी। 

मराठा शासकों ने दिल्ली पर कब्जा कर लिया था और अहमद शाह अब्दाली ने जिस स्थान पर मराठा साम्राज्य की सेना अपना डेरा जमाए हुए बैठी थी उसी स्थान का राशन पानी अहमद शाह अब्दाली ने रोक दिया था जिसके कारण मराठों को बहुत समय तक भूखा रहना पड़ा था लेकिन फिर भी मराठों ने लगभग अपनी 40,000 सेना को जीवित रखने की बहुत ही कोशिश की थी।

जब भूख और प्यास से मरते हुए मराठा सैनिकों ने अपना धैर्य खो दिया और अहमद शाह अब्दाली की नाकाबंदी को तोड़ने का फैसला किया और दोनों सेनाओं आमने-सामने हो गई जिसका एक बहुत ही बड़ा और भयंकर परिणाम हुआ इसमें बड़े पैमाने पर तो पानी की बमबारी के साथ मराठा सैनिकों को कुचलने का प्रयास किया गया लेकिन फिर भी मराठों ने अपनी श्रेष्ठता का उपयोग किया। 

मराठा सेना की होती दुर्गति को देखकर सदाशिव राव भाऊ ने युद्ध में अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने देखा कि उनका भतीजा इस युग में मारा गया और मराठा सेना अपने सेनापति को मरा हुआ समझकर युद्ध से भाग खड़ी हुई। 

लेकिन इस युद्ध के पश्चात मराठों की शक्ति बिल्कुल ही खत्म हो गई थी और हिंदुस्तान को मुगलों से आजाद कराने की जो मन में एक कसक थी वह भी मराठों के मन में ही रह गई थी।

इस युद्ध में लगभग 40,000 मराठा सैनिक हताहत हुए और लगभग 30,000 मराठा सैनिकों को अहमद शाह अब्दाली ने बंदी बना लिया था। 

पानीपत की लड़ाई का कारण

  • पानीपत की लड़ाई का मुख्य कारण मुगल बादशाहों द्वारा हिंदुस्तान पर हमेशा के लिए मुगल साम्राज्य की स्थापना करना था।
  • पानीपत की लड़ाई का एक मुख्य कारण यह भी माना जाता है कि हिंदुस्तान के राजपूत शासकों द्वारा मुगल शासकों को हमेशा के लिए हिंदुस्तान से खदेड़ना था।

पानीपत की लड़ाई कहां पर हुई थी?

  • पानीपत की लड़ाई भारत के हरियाणा राज्य के पास स्थित पानीपत के मैदान में हुई थी जोकि हरियाणा के कुरुक्षेत्र के पास ही स्थित है।
  • पानीपत की पहली लड़ाई मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर और लोदी वंश के शासक इब्राहिम लोदी के मध्य सन 1526 में हुई थी।
  • पानीपत की दूसरी लड़ाई मुगल सम्राट अकबर और हेमू के मध्य हुई थी जो कि लगभग सन 1556 में हुई थी।
  • पानीपत की तीसरी लड़ाई अहमद शाह अब्दाली जो कि एक अफगान शासक थे और मराठा पेशवा सदाशिव राव भाऊ के मध्य लगभग 1761 में हुई थी। 

पानीपत की लड़ाई के परिणाम

  • पानीपत की लड़ाई के पहले युद्ध के परिणाम स्वरूप हिंदुस्तान में हमेशा के लिए मुगल साम्राज्य की स्थापना हो गई जिस की कैद में हिंदुस्तान लगभग 1000 वर्षों तक रहा था।
  • पानीपत की लड़ाई के फल स्वरुप हिंदू साम्राज्य के सम्राटों को अनेक प्रकार की हानियां उठानी पड़ी थी जो कि लगभग अनगिनत सैनिकों की मृत्यु और अनगिनत हाथियों की मृत्यु के साथ खत्म हुई थी। 

पानीपत की लड़ाई के बाद क्या हुआ था?

  • पानीपत की पहली लड़ाई के पश्चात हिंदुस्तान में हमेशा के लिए मुगल साम्राज्य की स्थापना हो गई थी जिसके संस्थापक बाबर थे।
  • पानीपत की तीसरी लड़ाई के पश्चात अहमद शाह अब्दाली से मराठों के हारने के कारण मराठा शक्ति बहुत ही कम हो गई थी।

निष्कर्ष

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