भाषा किसे कहते है?

Bhasha kise kahte hai ( भाषा किसे कहते है? ) मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज में रहना तथा परिवार बनाना मनुष्य का एक गुण होता है। वेसे तो कुछ जानवर भी परिवार में रहते है, पर समाज में मनुष्य के तरह मिलजुल कर रहना सायद उनके लिए संभव नहीं है। इसके एक वजह मनुष्य की मानसिक तथा उसका शारीरिक विकाश भी है। 

मानसिक विकाश के चलते मनुष्य बाकि जानवरों से बहतर सोच सकता है। इससे उससे मिलजुल कर रहने में काफी मदद मिलती है। मिलजुल कर रहने में भाषा सबसे अहम भूमिका निभाता है। चलिये आज हम जानते है कि भाषा क्या है और इसके कितने प्रकार होते है।

भाषा क्या है –

मनुष्य के सुरुवाती प्रजाति आज के जैसे तरह तरह के भाषा बोलने में असमर्थ थे। वे महज कुछ आवाज का ही उत्पन किया करते है। अलग अलग परिस्थितियों के लिए अलग अलग आवाजों के इस्तेमाल करके वे एक दूसरे के साथ संपर्क स्थापित करते थे। आवश्यक अनुसार इसमें बदलाव आने लगा तो वे बहतर आवाज और बाद में शब्दो का भी उत्पन करते करते भाषा का उत्पन हुआ।

आज दुनिया भर के कोने कोने में अलग अलग तरह के भाषा का प्रचलन है, ऐसे कई क्षेत्र भी है जहाँ पर एक से ज्यादा भाषा का भी प्रचलन है। कुछ भाषाएं ऐसे भी है जो एक दूसरे के साथ मेल खाते है, यह एक साथ क्रमविकाश का महज एक उदहारण ही है। एक ही साथ विकसित होने के कारण ऐसे सामंजस देखने को मिलता है।

मनुष्य अपने भाव, चिंता तथा उद्देश्य को ब्यक्त करने के लिए जो माध्यम का इस्तेमाल करता है (जैसे की बोलना, लिखना) उसे हम भाषा कहते है। यह मनुष्य के क्रमविकाश के साथ साथ समान्तर रूप से विकशित होके आज इतना उत्कृष्ट बना है।

आसान भाषा में समझे तो मनुष्य अपने मन के भाव और विचारों को दूसरों के सामने बोलकर प्रकट करने को हम भाषा कहते है। ऐसे में दुनिया भर में आज करीब 7000 से ज्यादा भाषायों का प्रचलन है। उनमें से कुछ सिर्फ मौखिक रूप में ही इस्तेमाल किया जाता है, जिनका कोई भी लिखित रूप महजूद नहीं है।

भाषा की विशेषता –

  • भाषा निर्दिष्ट रूप से कुछ मतलब जाहिर करते है।
  • भाषा का लिखित रूप हो या न हो पर मौखिक रूप जरूर होता है।
  • यह किसी निर्दिष्ट समुदाय या फिर संप्रदाय तथा पुरे प्रदेश में प्रचलित हो सकते है।
  • किसी किसी भाषा में एक ही शब्द में वाक्य अनुसार अलग अलग तरह मतलब निकल सकते है।
  • भाषा में उच्चारणगत सुद्धता की आवश्यकता होती है, उच्चारण में त्रुटि के वजह से ये दूसरे मतलब भी निकाल सकते है।

भाषा के भेद तथा प्रकार –

भाषा को हम 3 हिस्सो में बाँट सकते है, मौखिक, लिखित और सांकेतिक। कई विद्वान सांकेतिक रूप को भाषा के भेद नहीं मानते, पर सांकेतिक रूप से भी मनुष्य अपने मन के भाव को प्रकट कर सकता है।

मौखिक रूप –

बोलकर अपने मन के भाव तथा चिंतन को प्रकट करना ही भाषा के मौखिक रूप होता है। एक दूसरे के साथ बातचीत करना, पढ़ना, फ़ोन पर बातें करना या भाषण देने आदि भाषा के मौखिक रूप होते है।

लिखित रूप –

वर्ण से अपने मन के भाव तथा विचारों को सजाना ही भाषा का लिखित रूप होता है। सालों का ज्ञान अगले पीढ़ी तक ले जाने तथा महत्वपूर्ण तथ्यों को सँभालने के लिए भाषा का लिखित रूप का उत्पन हुआ है। किताबें, अखबार, चिट्ठी आदि भाषा के लिखित रुप है।

सांकेतिक रूप –

भले ही कुछ विद्वान इसे भाषा का स्वरुप न मानते हो, पर सांकेतिक रूप या sign language आज पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है। जो ब्यक्ति बोलने में असमर्थ है वे इसी तरह के भाषाओं का इस्तेमाल किया करते है। 

इसके अलावा प्रान्तों के हिसाब से कुछ विशेष संकेत भी होते है। आशा है कि आप भाषा के बारे में काफी कुछ नया सीखा होगा। आज हमने भाषा क्या है और किसे कहते है इस बारे में काफी विस्तार से आलोचना की। पोस्ट के बारे में अपना विचार हमे कमेंट्स में जरूर बताएं।

आपने क्या सीखा ?

हमे आशा है की आपको Bhasha kise kahte hai ( भाषा किसे कहते है? ) विषय के बारे में दी गई जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर आपको इस विषय के बारे में कोई Doubts है तो वो आप हमे नीचे कमेंट कर के बता सकते है। आपके इन्ही विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिलेगा।

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