मातृभाषा किसे कहते हैं ?

Matri bhasha kise kahate hain

Matri bhasha kise kahate hain ( मातृभाषा किसे कहते हैं ) भाषा मनुष्य की पहचान होती है। मनुष्य के अलावा धरती पर मोजूद कोई भी जानवर भाषा का प्रयोग नहीं कर पाते। यह अलग बात है कि जानवर एक दूसरे से बात करने के लिए अलग अलग आवाजों का इस्तेमाल किया करते है.

जैसे की मनुष्य विकसित होते समय कर रहे थे। मनुष्य की मुख की संरचना कुछ इस प्रकार के है के वे अपने जीभ से आवाजों को शब्दों में बदल सकते है, चाहे इसे बरदान कहे या फिर निरंतर प्रयास के नतीजे, कुछ भी हो आज मनुष्य ही एक मात्र जिव धरती पर है जो के बोल सकते है।

भाषा क्या है?

प्रारंभिक समय से अगर देखा जाये तो इंसान के पूर्वज भी बोल नहीं पाते थे। बस कुछ खास तरह के आवाज से एक दूसरे से अपने भावना तथा खतरे की संकेत देते थे। ज्यादातर खतरे की संकेत वाली आवाजे तेज हुआ करती थी, आज भी बंदरों में यह गुण आप देख सकते है। 

बीतते समय के साथ साथ यही आवाज शब्दों के रूप लेने लगे, और इन्ही शब्दों से भाषा का उत्पन हुआ। वैसे तब तक इंसान दुनिया के कई सारे हिस्सो में फ़ैल गए थे, इसीलिये कई सारे अलग अलग भाषा का भी गठन हुआ। 

आवाजो के इस्तेमाल से सिर्फ कुछ खास तरह के बातों को ही समझा सकने वाला इंसान अब भाषा के प्रयोग से अपने मन के भवन तथा कई सारे संबेदनसिल बातों का भी जिक्र कर पा रहा था।

मातृभाषा क्या है?

कोई भी मनुष्य जो भाषा अपने परिवार से सीखा हुआ हो उसे हम मातृभाषा कहते है। यह भाषा वो बचपन में अपने माता, पिता, भाई तथा घर के अन्य सदस्यों से सुन कर सीखता है। इसके लिए किसी प्रकार के तालीम तथा अभ्यास की जरुरत नहीं होती है, क्यों के राजमार्रे के जिंदेगी में यह उसके घर में रोज इस्तेमाल किया जाता है।

मातृभाषा किसी इंसान की खिड़ की पहचान की तरह ही होती है। जैसे हम किसीको उसके नाम से जानते है, ऐसे ही मातृभाषा उसे उसके ही लोगों से मिलाता है। मातृभाषा से हमे जितना लगाव होता है, सायद ही कोई और भाषा हो जिसे हम इतना प्यार दे सकते है! 

राष्ट्रभाषा, राज्यभाषा और मातृभाषा में क्या अंतर है?

वैसे तो तीनों में अंतर हो भी सकते है और नहीं भी यह समझने की बात है, परंतु अगर हम परिभाषा के नजरिये से देखेंगे तो पाएंगे कि तीनों के तीनों अलग अलग विशेषता के लिए बनी है।

राष्ट्रभाषा

किसी भी राष्ट्र या देश के द्वारा अपने सरकारी कार्य को संपन्न हेतु अपनाया हुआ भाषा को हम राष्ट्र भाषा के रूप में जानते है। कोई भी राष्ट्र अपने सभी प्रदेशो में बोली सबसे अधिक बोली  जाने वाली भाषा को ही अपना राष्ट्र भाषा के तौर पर चुनती है। 

अगर हम भारत की बात करे तो भारत के ज्यादातर हिस्से जैसे की उत्तर भारत, मध्य, और पूर्वी इलाकों में हिंदी भाषा बोली जाती है, जिससे के यह भाषा को राष्ट्र भाषा के तौर पर चुना गया है।

राज्यभाषा

राष्ट्र के तरह राज्यों का भी यह अधिकार है कि वे अपने राज्यो के लिए एक सरकारी भाषा का चयन करे , राष्ट्र जिस मापदंड से अपनी राष्ट्रभाषा को अपनाती है उसी तरह ही राज्य अपने राज्यभाषा चुनते वक़्त करती है। 

कभी कभी राज्य भाषा और राष्ट्रभाषा एक ही होता है, जैसे की मध्यप्रदेश की राज्यभाषा हिंदी है और भारत के भी राष्ट्रभाषा हिंदी है। परंतु हमेशा से यह एक सामान नहीं हो सकता, जैसे की ओडिशा प्रदेश जो के ओड़िआ को अपने राज्यभाषा के तौर पे स्वीकार चुकी है, हालांकि यहाँ के लगभग सभी लोग हिंदी को समझ और बोल पाते है फिर भी बोलते नहीं।

मातृभाषा

भारत वर्ष में लगभग 325 भाषा (सरकारी तौर पर) है। लेकिन जो भाषा किसी भी इंसान द्वारा पहली दफा सीखा गया हो, और इसके परिवार द्वारा वो भाषा अपनाया गया हो सिर्फ वही उसकी मातृभाषा हो सकता है। 

वैसे तो मातृभाषा के ज्ञान के साथ साथ दूसरे भाषायों का ज्ञान भी जरुरी है, इससे न सिर्फ हम दूसरों के रिटी रिवाज, रहनसहन के बारे में जानते है बल्कि एक शोध के अनुसार एक से ज्यादा भाषा बोलने वाले बच्चे सिर्फ एक भाषा बोलने वाले बच्चों से कई ज्यादा बुद्धिमान होते है।

मातृभाषा का आवश्यकता क्या है?

भिन्न भिन्न प्रान्तों से मनुष्य की विकाश होने के कारण अलग अलग प्रकार के रीतिरिवाज, संस्कृति तथा ज्ञान का भी विकाश हुआ। इन सबको संभाले रखने के लिए मातृभाषा की अबश्यकता रहती है।

आपने क्या सीखा ?

हमे आशा है की आपको Matri bhasha kise kahate hain ( मातृभाषा किसे कहते हैं ) विषय के बारे में दी गई जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर आपको इस विषय के बारे में कोई Doubts है तो वो आप हमे नीचे कमेंट कर के बता सकते है। आपके इन्ही विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिलेगा।

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