ईमानदारी की परिभाषा

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Imaandari ki paribhasha Essay ईमानदारी का सामान्य भाषा में मतलब एक मनुष्य की सभी आयामों में सच्चा और सही होना होता है। कभी जूठ नही बोलना, कभी किसी को गलत बात को लेकर दुखी नही करना इत्यादि ईमानदारी का हिस्सा है। 

ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नही होना जो नैतिक रूप से गलत हो और उसके गलत और अनैतिक प्रभाव हो। हमारे लिए ईमानदारी की परिभाषा क्या है ? 

हमारे लिए ईमानदार होने का मतलब अनैतिक कार्यों को त्याग कर अच्छे और सही कामों को करना, जूठ, पाप भरे इतियादी कामों को छोड़ना और अच्छे कार्य को करना। 

ईमानदारी क्या है ? | Imaandari ki paribhasha Essay

जीवनभर किसी कार्य के प्रति विश्वनीय होना ही ईमानदारी है। एक व्यक्ति को दूसरों के प्रति, दूसरों के काम के प्रति और अपने काम के प्रति विश्वनीय होना चाहिए। चोरी नही करना, लालच नही करना इत्यादि भी ईमानदारी में ही आते है। 

ईमानदारी एक नैतिक अवधारणा है। सामान्य भाषा में ईमानदारी का सीधा मतलन ईमानदारी से होता है परन्तु विस्तृत रूप में ईमानदारी मन, वचन, कर्म से प्रेम और अखंडता, अहिंसा, विश्वास जैसे गुणों पर बल देता है। ईमानदारी व्यक्ति को निष्पक्ष और विश्वासपात्र बनाता है। 

ईमानदारी से निर्णय लेने को प्रभावित करने वाले कारक

ईमानदारी को प्रभावित करने वाले यह कुछ निम्न कारक है जो इस महत्वपूर्ण है। जानकारी हिंदी में

  • लालच – ईमानदारी को प्रभावित करने में लालच सबसे महत्वपूर्ण करक है। किसी भी काम को करने में अगर ईमानदारी नही है और लालच है तो वो ईमानदारी के लिए सबसे बड़ा घातक है। 
  • वातावरण – ईमानदारी को प्रभावित करने में वातारण और परिवार के महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारे आसपास वातावरण किस प्रकार का रहता है। अगर वातावरण में रहने वाले लोग ईमानदार है तो हमारे में भी वो ही ईमानदारी की लक्षण दिखने लगेंगे। अगर वातावरण सही नही है तो ईमानदारी में भी दाग लग सकता है। 
  • शिक्षा और ज्ञान – ज्ञान और शिक्षा भी ईमानदारी को प्रभिव्त`प्रभावित करने में सबसे महत्वपूर्ण कारक है। अगर व्यक्ति के पास अच्छी शिक्षा और अच्छा ज्ञान है तो वो व्यक्ति हमेशा ईमानदार ही रहेगा, वही अगर व्यक्ति में शिक्षा और ज्ञान की कमी है तो ईमानदारी में भी कमी दिखने लगेगी। 
  • सुसंगती – व्यक्ति और किसी पुरुष की संगती अगर अच्छी है तो वो ईमानदारी के खिलाफ नही जाएगा। वही अगर किसी व्यक्ति के पास सुसंगति है तो वो ईमानदारी से काम करने में भी संकोच करेगा। सुसंगति ईमानदारी को प्रभावित करने का सबसे बड़ा कारक है।
  • अनुशासन – एक अच्छा अनुशासन किस व्यक्ति के व्यवहार और उसकी ईमानदारी की परिभाषा बता देता है। अनुशुसित व्यक्ति के बारे में शक करना भी नामुमकिन है की उस पर कोई शक करता है नही। अगर किसी व्यक्ति के पास अनुशासन नही है तो वो व्यक्ति ईमानदार नही रह सकता है। 
  • साहस – साहस, इस शब्द में ही हिम्मत छुपी है। अगर किसी के पास साहस है और वो खुद को ईमानदार रख सकता है तो वो ईमानदार रह सकता है। वही अगर कोई व्यक्ति अनुशासन को तोड़ने का साहस रखता है और बेईमानी की और जाने का साहस या प्रयास करता है तो वो ईमानदारी पर एक कलंक लगा सकता है। 

झूठ का सहारा लेके ईमानदार व्यक्ति बेईमान क्यों बन जाता है ?

हम कई बार अपने आसपास भी देखते है की किसी एक काम को करने के लिए झूठ का सहारा लेते है। ईमानदारी की परिभाषा के विपरीत जाने का प्रयास करता है। झूठ बोलने अपने आप में एक बेईमानी है और यह ईमानदारी के खिलाफ है। 

कई बार हमे ऐसा देखने को मिलता है की एक व्यक्ति अपने काम को बनाने के लिए और निकालने के लिए झूठ बोलता है और उसके बाद उस झूठ को छुपाने के लिए और कई झूठ बोलने पर मजबूर हो जाता है। 

  • डांट से बचने के लिए – एक झूठ से बचने के लिए और डांट से बचने के लिए भी कई बार झूठ का सहारा लेने में मजबूर लोग अपनी ईमानदारी को खोने में मजबूर हो जाते है। कोई भी विद्यार्थी अगर अपने स्कूल और कॉलेज ने शिक्षक की डांट से बचने के लिए भी झूठ का सहता लेता है। जितना ज्यादा झूठ बोला जाता है ईमानदारी उतनी ही पीछे छूटती जाती है।
  • दूसरों को खुश करने के लिए – कई बार स्कूल में या घर में विद्यार्थीयों को हमने अपने दोस्तों को खुश करने या उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए भी झूठ का सहारा लेते है और झूठ बोलने को मजबूर हो जाते है। दूसरों को खुश करने के लिए बोला जाने वाला झूठ कुछ दिन ही अच्छा दिखाई देता है उसके बाद वही झूठ हमारे लिए नासूर बन जाता है। 
  • लालच में आकर झूठ बोलना – किसी चीज़, वस्तु को पाने के लिए या अतिउत्साहित होकर झूठ बोलने के लिए मजबूर होना भी अपने आप में एक गलत बात है और यह ईमानदारी को कम करने का एक महत्वपूर्ण कारक है। चीज़ों को जल्द से जल पाने के लिए या कम सामान्य में ज्यादा पैसे कमाने के लिए लालच में आकर बोला जाने वाला झूठ भी हमारे लिए हानिकारक हो सकता है। 
  • आपसी स्पर्धा – आपसी स्पर्धा और दुसरो से Competition करने के लिए भी कई बार विद्यार्थी खुद से या दूसरों से झूठ बोलते है। झूठ बोलने का सीधा सा मतलब है अपनी दूसरों की नजरों में अविश्वसनीय बनना। दुसरो से जीतने की जिद में भी खुद से और दूसरों से झूठ बोलना भी ईमानदारी को प्रभावित करने का एक कारक है। 
  • हालत से मजबूर होकर – हमने कई बार ऐसी बातें भी नोटिस की है की कुछ लोग गरीबी, बेरोजगारी इत्यादि से तंग आकर भी झूठ का सहारा लेता है। कई बार इंसान को खुद के हालत ही उसे झूठ बोलने पर मजबूर करते है। अगर कोई व्यक्ति अपने काम से परेशान है तो वो खुद भी झूठ बोलेगा ताकि वो अपने काम के बारे दूसरों को अच्छा बता सके। 
  • ताकतवर बनने के लिए झूठ बोलना – कई बार बार लोग ताकतवर बनने जैसे पैसों से अमीर बनने के लिए भी कई बार लोग झूठ बोलते है। कम समय में ज्यादा पैसे कमाने के लिए भी कई लोग झूठ बोलते है और ताकतवर बनने के लिए झूठ बोलते है। इस तरह से झूठ बोलने पर भी ईमानदारी पर कलंक लगता है। 

बेईमानी के परिणाम 

एक व्यक्ति अपने बेईमान कार्य में किस प्रकार से प्रभाव डाल सकता है। बेईमान व्यक्ति भी दूसरों के जीवन को प्रभावित करता है। बेईमान व्यक्ति किस प्रकार से दूसरों को प्रभावित करता है। बेईमानी के परिणाम – 

  • ईमानदारी से भटकना – बेईमानी करने से कोई भी व्यक्ति अपनी ईमानदारी से भटक जाता है। बेईमानी का यह सबसे बड़ा परिणाम है। 
  • दुसरो की संगत ख़राब करना – बेईमानी करने वाले व्यक्ति दूसरों की संगत भी बिगाड़ सकता है। कोई व्यक्ति अगर खुद बेईमान है तो वो अपने इस काम से दूसरों की संगत भी बिगाड़ सकता है।
  • लालच में पड़ना – बेईमान व्यक्ति खुद एक लालची व्यक्ति भी बन सकता है। अगर कोई व्यक्ति बेईमान बनता है तो वो इसके साथ लालची भी बढ़ सकता है। 
  • मानसिक तनाव में बढ़ोतरी – हम बेईमान रहकर अगर झूठ बोलना शुरू करते है और गलत काम करना शुरू करते है तो इससे हमारा मानसिक तनाव बढ़ता है और इससे हमे मानसिक तनाव महसूस होता है और कई तरह की बीमारी भी होती है डिप्रेशन इत्यादि। Imaandari ki paribhasha Essay

हमें हमेशा ईमानदार क्यों रहना चाहिए

हमारे जीवन का एक ही उद्देश्य होना चाहिए, हमें हमेशा ईमानदार बने रहना चाहिए। ईमानदारी हमारे जीवन का एक मूल उद्देश्य होना चाहिए। ईमानदार बनने से लोगो में हमारे प्रति विश्वास बढ़ता है। 

ईमानदार होने से हमें हमेशा एक सकारात्मक प्रकाश मिलता है जो हमारे जीवन की रौशनीमय बनाता है। ईमानदारी हमारे जीवन में सबसे ज्यादा जरुरी है। ईमानदार हमे सभी तरह के तनाव और परेशानी से आजाद करने में मदद करता है। 

ईमानदार रहने से हम तनावमुक्त रहते है जिसकी वजह से हम कई तरह की बिमारियों से बचे रह सकते है जैसे रक्तचाप, थकान, कमजोरी इत्यादि। इन सभी तरह के रोगों से हम बचे रहते है। ईमानदार रहने से हमारे मन में शान्ति और दिमाग भी शांत रहता है। 

बेईमानी में आके हम झूठ बोलते है और इस झूठ की वजह से भी कई तरह की बिमारियों के शिकार होते है। सभी तरह की बीमरियों से बचने के लिए हमें झूठ नही बोलना चाहिए। अगर हम झूठ बोलते है तो हमारे मन में तनाव और चिंता हमेशा बनी रहती है जो की हमारी इन सभी बिमारियों का कारण बनती है। 

ईमानदारी में मेरा अनुभव

ईमानदार बने रहना हमारे लिए बेहद ही अच्छा और सुखमय वाला अनुभव रहा है। जीवन में हमेशा बिना किसी तनाव से मुक्त रहना, यह भी ईमानदारी का ही परिणाम है। लोगो में खुद के लिए विश्सनीयता बनाये रखने के भी ईमानदारी का सबसे अहम योगदान है। 

बेईमानी और झूठ से बचने के लिए और लोगो को इसी के बारे में सीखाना भी खुद के लिए एक अच्छा अनुभव रहा है। ईमानदारी से हमारे कई रिश्तों में मजबूती आई है। लोग अब मेरी बातों पर विश्वास करने लगे है। लोगो के मन में मेरे लिए एक अलग सा सम्मान है और वे ही लोग अब हमारे बारे में बातें करते है। ईमानदार होना एक अच्छी आदत जो मुझे एक अच्छा अनुभव देती है। 

निष्कर्ष

ईमानदार होना हर किसी के लिए एक अच्छी सीख है। ईमानदारी से कई काम आसानी से किये जा सकते है वही बेईमानी से कोई भी काम को करना आसान नही रहता है। 

प्रतिफल

बेईमान से तो ईमानदारी लाख गुना बेहतर है। किसी भी तरह की बेईमानी रखना, यह इंसान के लिए समस्या कड़ी कर सकता है। जीवन में हमेशा लोगो और काम के प्रति ईमानदार रहे। Imaandari ki paribhasha Essay

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