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भारत का राष्ट्रिय खेल कौनसा हैं ?

Bharat ka rashtriya khel kaun sa hai नमस्कार दोस्तों, हम और आप देश और शहर में कई खेल खेलते हैं। हम जो खेल खेलते हैं उनमे कई खेल हैं जैसे क्रिकेट, फुटबॉल, बास्केटबॉल इतियादी। क्या आप जानते हैं की भारत का राष्ट्रिय खेल कौन सा हैं ? अगर आप इसके बारे में नहीं जानते हैं तो आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जायेगी। 

भारत का राष्ट्रिय खेल कौनसा हैं ? | Bharat ka rashtriya khel kaun sa hai

हॉकी को हम भारत के राष्ट्रिय खेल के रूप में जानते हैं। वैसे तो हमारे देश में कई खेल खेले जाते हैं। इन खेलों की सूची में क्रिकेट और फुटबॉल सबसे ऊपर हैं। 

भारत का राष्ट्रिय खेलहॉकी
हॉकी की शुरुआत 4000 साल पहले
हॉकी में कितने खिलाडी होते हैं11
हॉकी खेल की शुरुआत कहा से हुईमिश्र से मानी जाती हैं
Bharat ka rashtriya khel kaun sa hai

भारत में खेल की मान्यता

भारत में क्रिकेट को बहुत पसंद किया जाता है। इसकी लोकप्रियता भारत में देखते ही बनती है । भारत में बच्चे से लेकर बुड्ढे तक क्रिकेट खेल को देखना पसंद करते है। वहीं बहुत से लोग इसी  खेल को ही राष्ट्रीय खेल समझने की भूल कर बैठते है। 

अमेरिका में बेसबॉल को नेशनल गेम मानते है। भारत में लोग जितने चाव से क्रिकेट खेलना पसंद करते हैं ,वैसे ही अमेरिका में लोगों को बेसबॉल भाता है। वहीं इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय खेल ही क्रिकेट है। इंडिया के जैसे इन दोनों देशों में क्रिकेट को काफी महत्व दिया जाता है, तो चलिए आज जानते हैं कि भारत का राष्ट्रीय खेल आखिर कौन सा है ? 

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भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी कहे जाने के पीछे वजह

भारत का कोई राष्ट्रीय खेल खैर अभी तो नहीं है। भले ही वेबसाइट और किताबी ज्ञान से आप हॉकी को नेशनल गेम मान बैठे हो ,लेकिन खेल मंत्रालय ने बीते समय स्पष्ट कर दिया था कि भारत में वर्तमान में कोई राष्ट्रीय खेल घोषित नहीं किया गया है । 

असल में बीते कुछ समय से लोगों को सूचना के अधिकार के अतंर्गत सरकार से राष्ट्रीय खेल राष्ट्रीय खेल की जानकारी लेना चाह रहे थे। इसके जवाब के रूप में खेल मंत्रालय ने साफ तौर पर क्लियर कर दिया है, कि सरकार ने फिलहाल अभी तक किसी भी खेल को राष्ट्रीय खेल घोषित नहीं किया है। 

और इसके पीछे एक वजह यह है कि सरकार इंडिया में खेलों को प्रोत्साहन देना चाहती है। वही जब हॉकी का जिक्र आता है ,तो इस खेल में भारत का नाम काफी हद तक गौरवान्वित किया है। भारतीय हॉकी टीम ने साल 1928 में पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था। 

इसके बाद भारतीय हॉकी टीम ने देश के लिए ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने का इतिहास कायम किया था। 1928 और 1956 के बीच को भारतीय हॉकी टीम का स्वर्णिम युग के नाम से जाना जाता है क्योंकि इस दौरान भारतीय हॉकी टीम ने लगातार ओलंपिक स्वर्ण पदक हासिल किए थे।

इसी के बीच भारत को हॉकी का जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद जैसे महान हॉकी के खिलाड़ी भी मिले थे।जिन्होंने अपने टैलेंट के बल पर खेल रत्न अपने नाम किया था। इस ब्लॉग को पढ़कर आपको भारत के राष्ट्रीय खेल के बारे पूरी जानकारी मिल गई होगी। फिलहाल वर्तमान में भारत का कोई राष्ट्रीय खेल घोषित नहीं हुआ है और इसके पीछे जायज वजह भी है। 

भारत सरकार सभी खेलो को बढ़ावा देना चाहती है। यही वजह है कि इस देश का अब तक कोई राष्ट्रीय खेल घोषित नहीं हुआ है। हॉकी खेल के क्षेत्र में भारतीयों ने अपना परचम लहराया है। यही वजह है कि लोगो के मन में राष्ट्रीय खेल के सवाल पूछे जाने पर हॉकी ही राष्ट्रीय खेल के रूप में आता है। 

जबकि इसमें कोई सच्चाई नहीं है । इस बात का स्पष्टीकरण खेल मंत्रालय की ओर से किया गया है। एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपको यह पता होना आवश्यक है कि भारत का कोई राष्ट्रीय खेल है या नहीं।

हॉकी खेल का मैदान कैसा होता है?

हॉकी खेल का मैदान बहुत बड़ा होता है और इस पर लगभग घास बिछी हुई होती है। यदि पास उपलब्ध नहीं हो तो वहां पर विशेष प्रकार की मेड बिछाई जाती है। सन 1950 के दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खेल में भारत का प्रदर्शन बहुत ही गौरव पूर्ण था और इसी कारण भारत ने अपना इसे राष्ट्रीय खेल घोषित किया था. 

क्योंकि उस समय मेजर ध्यान चंद जैसे कलाकार और खिलाड़ी हमारे हॉकी खेल खेलते थे जो कि इस खेल को भी बहुत ऊंचाइयों तक लेकर गए थे और इसी कारणवश हमारे देश का इसे राष्ट्रीय खेल घोषित कर दिया गया था।

हॉकी खेल का पूरा नाम फील्ड हॉकी है और इस खेल में एक बार में लगभग 2 टीमें ही खेल सकती है और प्रत्येक टीम में 11 खिलाड़ी का होना अनिवार्य है। इस खेल में खिलाड़ियों का वितरण इस प्रकार होता है कि 10 खिलाड़ी तो मैदान में होते हैं और एक खिलाड़ी गोलकीपर के रूप में होता है। भारत ने अभी तक हॉकी खेल में ओलंपिक में लगभग 8 स्वर्ण पदक जीते हैं.

और अफसोस की बात यह है कि भारत में अभी तक विश्व कप एक ही जीत पाया है महिला कॉमनवेल्थ में एक बार विजेता रह चुका है हॉकी के अंतर्गत इसी कारण भारत हॉकी में विभिन्न ऊंचाइयां छू रहा है। 

भारत के भारतीय हॉकी संस्थान की स्थापना सन 1925 में की गई थी भारत की हॉकी टीम ने पहली बार विदेश में अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा न्यूजीलैंड में की थी जहां पर हमारी भारतीय टीम ने 21 मैच खेले थे और उनमें से 18 मैच जीते थे और तीन मैच में एक मैच भारतीय हॉकी टीम हार गई थी और उन में से दो मैच ड्रॉ रहे थे. 

इस अंतरराष्ट्रीय यात्रा में खेल के महान मेजर ध्यानचंद ने अपने आप को स्थापित किया था संग 1928 में भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था।  संग 1928 से लेकर सन 1956 तक भारतीय हॉकी टीम ने इस सीजन में लगातार 6 ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते थे। भारतीय हॉकी टीम का रिकॉर्ड है कि उसने लगातार 24 मैच जीते थे।

भारतीय हॉकी टीम ने जब 24 मैच लगातार जीते थे उस समय उसने 178 गोल किए थे और हाफ में केवल 7 ही मैच जीते थे।

जब भारतीय टीम ने ओलंपिक में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था उस समय इसमें खिलाड़ी रिचार्ज एलाइन, ध्यानचंद, माइकल गेटली, विलियम गुड सर लेस्ली हैमर्ड फिरोज खान संतोष मंगलानी आदि के साथ-साथ शौकत अली और जयपाल भी खिलाड़ी थे।

जब भारतीय हॉकी टीम अपनी इस जीत को लगातार बनाए हुए थी तो इस जीत का सिलसिला लगभग संग 1960 के आसपास रोम में हुए ओलंपिक खेल में समाप्त हो गया था क्योंकि इस मैच में भारतीय हॉकी टीम पाकिस्तान हॉकी टीम से हार गई थी। भारतीय हॉकी टीम ने सन 1964 में हुए टोक्यो ओलंपिक और सन 1980 में हुए मास्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था हमारी भारतीय हॉकी टीम 1975 में मलेशिया में आयोजित हॉकी विश्व कप में विजेता रही थी। 

हॉकी खेल के नियम

हॉकी खेल को लगभग 2 बराबर हिस्सों में खेला जाता है और प्रत्येक में 35 मिनट का टाइम होता है लेकिन सन 2014 के बाद में हॉकी में विशेष बदलाव किए गए थे जिसमें की 4 हिस्सों में बांटा गया था और प्रत्येक हिस्से को 15 मिनट का समय दिया गया था और इसमें हर पीरियड के बाद लगभग 2 मिनट का ब्रेक होता था और प्रत्येक हॉकी टीम के पास 11 खिलाड़ी होने थे. 

जिनमें से 10 खिलाड़ी तो मैदान पर होते थे और एक खिलाड़ी गोलकीपर के रूप में अपनी भूमिका निभाता है जो भी टीम में खेलने आती थी उनमें से प्रत्येक हॉकी खिलाड़ी के पास एक हॉकी स्टिक जोकि डेढ़ सौ से लेकर 200 सेंटीमीटर लंबा हॉकी स्टिक होता हैं। यह हॉकी स्टिक चपटे विस्तार में समाप्त होता था जिसे ब्लड के रूप में गिना जाता था एक हॉकी स्टिक का वजन लगभग 737 ग्राम के आसपास होता है।

हॉकी गेम में एक छोटी सी गेंद होती है जो कि प्लास्टिक की बनी होती है वह की टीम जब खेलती है तो दोनों तरफ के खिलाड़ी इसे मारने के लिए दौड़ते हैं और यह शायद हॉकी स्टिक शहतूत की लकड़ी की बनी होती है हॉकी खेल का मुख्य उद्देश्य बोल को ही टेरिबल और उस करना होता है इसमें यह कहा जाता है कि प्रत्येक टीम को अपनी विपरीत दिशा में गोल करना होता है और सभी खिलाड़ी इसे गोल करने का प्रयास करते हैं।

जब ग्राउंड में दो टीमें आपस में हॉकी खेलती है तो जो बोल ग्राउंड में होती है उसको कोई भी खिलाड़ी अपने शेर से लात नहीं मार सकता तथ वह उस गेंद को उठा भी नहीं सकता है। हॉकी जब खेला जाता है तो उस समय हॉकी के मैदान में लगभग 2 एंपायर मैच की अंपायरिंग करते हैं वह खिलाड़ियों का ध्यान रखते हैं कि कोई भी खिलाड़ी होगी के नियम का अनुपालन तो नहीं कर रहा है यह उनकी बहुत ही सख्त निगरानी रखते हैं।

हॉकी खेल का इतिहास

हॉकी खेल शायद में सबसे पुराना खेल है और यह प्राचीन काल में भी खेला जाता था इस खेल की शुरुआत लगभग 12 साल पहले हुई थी उसमें एक छड़ी से गेंद को मारा जाता था और इससे पहले सरल रूप से खेला जाता था।

प्राचीन काल में हॉकी को विश्व की सभी जातियों द्वारा प्रमुख रूप से खेला जाता था लेकिन हॉकी का आधुनिक रूप अंग्रेजों द्वारा प्रदान किया गया है।

भारत में हॉकी का बेताज बादशाह किसे कहा जाता है?

भारत में हॉकी का बेताज बादशाह मेजर ध्यानचंद को कहा जाता है वह एक ऐसे खिलाड़ी थे हॉकी के की कोई भी खिलाड़ी उनके खेलने के तरीके को समझ नहीं पाया था।

भारतीयों की क्रिकेट में बढती रुची

वर्तमान में भारत में क्रिकेट काफी ज्यादा खेला जाता हैं। इतना ही नही भारत ने इसमें कई कीर्तिमान भी रचे हैं। हम भारत में बढती लोकप्रियता के साथ आईपीएल का नाम भी सुनते हैं जो की भारत में हर साल आयोजित किया जाता हैं। खेल यह तो क्रिकेट की बात हैं और हम दिल से हॉकी को पसंद करते हैं और यह हमारे लिए राष्ट्रिय खेल से कम नही हैं।