मकर संक्रांति कब आती है ?

Makar sankranti kab aati hai (  मकर संक्रांति कब आती है ? ) हिन्दू धर्म हर साल कई सारे त्यौहार और पर्व मनाया जाता है। हर त्यौहार के कुछ अपने विधि विधान होने के साथ साथ खासियत भी होती है। ऐसे में कुछ खास त्यौहार और पर्व ऐसे होते है जो पूरे भारत वर्ष के साथ साथ कुछ बहार देश में भी एक साथ मनाया जाता है, जिनमे से मकर संक्रांति एक है। चलिये जानते है यह त्यौहार कब और क्यों मनाया जाता है?

मकर संक्रांति क्या है?

हिन्दू धर्म के साथ साथ कई और धर्म तथा देशों में हमे राशि की संख्या 12 ही देखने को मिलते है। हर राशि एक महीने की लिए चलता है, भले ही अंग्रेजी के माह हमेशा 1 तारीख को शुरू होकर 30 या 31 (फ़रवरी अपवाद है) को खत्म हो, लेकिन ही हिन्दू धर्म के माह अंग्रेजी माह के उलट आधे में शुरू होते है। 

जब सूर्य देव एक राशि को छोड़ कर दूसरे राशि में प्रवेश करते है तोह दिन और तिथि को संक्रांति कहते है। ऐसे में जब सूर्य देव धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करते है तो यह दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

सूरज मकर संक्रांति के बाद उत्तर दिशा के और अग्रसर होने के कारण कहीं कहीं इसे उत्तरायण भी कहते है।

मकर संक्रांति कब मनाया जाता है?

हिन्दू माह के पौष में जब सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते है तो इस पावन दिन को पूरे भारत वर्ष में मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

यह अंग्रेजी माह जनुअरी के 14 या फिर 15 तारीख को आता है, कभी कभी ऐसा देखा गया है कि यह 12 या फिर 13 तारीख में भी हो सकता है, मगर ज्यादा समय यह 14 तारीख में ही होता है।

भारत के भिन्न भिन्न प्रान्तों में इसे भिन्न भिन्न नाम से मनाया जाता है। इस दीन आपको कई जगह बच्चे पतंग उड़ाते हुए भी नजर आएंगे।

मकर संक्रांति के महत्व-

इस दिन पुण्य काम जैसे की दान, धर्म आदि किया जाता है। बताया जाता है कि इस दिन दान धर्म करने से पुण्य सौ गुना बढ़ जाता है। इसलिए इस को लोग कपडे, खाना, घी आदि का दान करते है।

इस दिन गंगा में स्नान और गंगा के तट पर दान करने के कई सारे महत्व है। इसीलिए गंगा नदी के किनारे इस दिन भीड़ जमा रहता है।

इस दिन तीर्थराज प्रयाग और गंगासागर में किया गया स्नान को महास्नान की आख्या प्राप्ति है। यह दोनों जगह लोग स्नान करके मोक्ष की प्राप्ति कर सकते है ऐसे मान्यता है।

कुछ लोककथा के माने तो इस दिन सूर्य देव अपने बेटे शनि देव के घर घूमने आते है। आपको याद होगा हमने बताया था कि इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते है, और मकर राशि के स्वामी और अधिपत्य शनि देव का होता है। यह भी मकर संक्रांति के महत्व को और कई गुना बढ़ा देता है।

मकर संक्रांति कहाँ कहाँ मनाया जाता है?

वेसे तो यह एक हिन्दू पर्व है, लेकिन भारत समेत इसे नेपाल, बांग्लादेश के कुछ हिस्से में भी मनाया जाता है। मकर संक्रांति के नाम अलग अलग जगह पर कुछ इस प्रकार के है-

पूर्व एयर मध्य भारत के हर राज्य, कर्नाटक में यह मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है, जब के बंगाल के कुछ हिस्सों में यह पौष संक्रांति , तमिलनाडु में पोंगोल , गुजरात और उत्तराखंड में उत्तरायण के नाम से भी यह जाना जाता है।

आपने क्या सीखा ?

हमे आशा है की आपको Makar sankranti kab aati hai (  मकर संक्रांति कब आती है ? ) विषय के बारे में दी गई जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर आपको इस विषय के बारे में कोई Doubts है तो वो आप हमे नीचे कमेंट कर के बता सकते है। आपके इन्ही विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिलेगा।

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