नवरात्रि का दूसरा दिन : मां ब्रह्मचारिणी की कैसे करें पूजा, जानिए मंत्र और स्तोत्र

Navratri ka dusra din

नवरात्रि का दूसरा दिन : माँ की पूजा, ब्रह्मचारिणी की पूजा, पूजा की विधि, पूजा का शुभ मुहुर्त, पूजा कैसे करे। माँ को खुश कैसे करे | Navratri ka dusra din : Maa ki pooja, bramcharini ki pooja, pooja ki vidhi, pooja ka muhurt, pooja kaise kare 

नवरात्रि का दूसरा दिन : माँ की पूजा, ब्रह्मचारिणी की पूजा, पूजा की विधि, पूजा का शुभ मुहुर्त, पूजा कैसे करे। माँ को खुश कैसे करे – 

9 दिवस की नवरात्रि में दुसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। यह माता का दूसरा रूप है। नवरात्रि के इस दुसरे दिवस में हम माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करते है। ब्रह्मचारिणी को सरस्वती के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि ब्रह्मचारिणी माता की पूजा करने से मन और मस्तिक को शक्ति प्राप्त होती है। 

नवरात्रि का दूसरा दिन : ब्रह्मचारिणी

नवरात्रि के दुसरे दिन दुर्गा माँ की पूजा ब्रह्मचारिणी के रूप में की जाती है। देवी के इस रूप को माता पार्वती का अविवाहित रूप माना जाता है। माँ ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की थी। ब्रह्मचारिणी तपस्या, वैराग्य और ज्ञान की देवी के रूप में जानी जाती है। 

माता के एक हाथ में जप की माला और दुसरे हाथ में कमण्डल रहता है। माता ब्रह्मचारिणी की तपस्या करने से यश, बुद्धि में वृद्धि होती है। माता की पूजा कर के व्यक्ति स्वयं विज्य चुन सकता है। 

पूजा की विधि : ब्रह्मचारिणी 

माता की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठे और स्नान करे और पूजा के स्थान पर गंगाजल डाल कर उसे पवित्र करे। इसके बाद 

घर में दीप प्रज्वलित करे। 

माँ का गंगाजल से अभिषेक करे। 

अब माँ दुर्गा को अर्घ्य दें।

माँ को अक्षत, लाल सिंदूर और पुष्प अर्पित करे और फल और मिठाई का भोग लगाये। 

इसके बाद धुप कर करे माता चालीसा का जाप करे। 

माँ ब्रह्मचारिणी की कथा 

माता की कथा के रूप में इन शब्दों का जप कर सकते है। माँ ब्रह्मचारिणी के लिए यह पौराणिक कथा प्रचलित है। 

“माता ब्रह्मचारिणी ने राजा हिमालय के घर पर जन्म लिया था। माता ब्रह्मचारिणी ने नारदजी के कहने पर शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। कठिन तपस्या करने के कारण की माता के इस रूप को ब्रह्मचारिणी के रूप में जाना जाने लगा। 

भगवान शिव की आराधना करने के दोहरान माता ने 1000 वर्ष तक केवल फल-फूल का ही सेवन किया और 100 वर्षों तक शाख खाकर जीवित रही। इस कठोर तपस्या से उनका शारीर क्षीण हो गया था। उनकी इतनी कठोर तपस्या देख के सारे देवी और देवता उनसे काफी प्रसन्न हो गये थे। इसने बाद इन्हें भगवान शिव पति के रूप में प्राप्त हुए।”

माँ ब्रह्मचारिणी के मंत्र

सबसे पहले श्लोक – 

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु| देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||

ध्यान मन्त्र – 

#1 

वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।

जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥

#2

गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।

धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥

नवरात्रि के दुसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी को खुश करे, आपकी हर मनोकामना पूर्ण होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

International Tribal Day : Day of the World’s Indigenous Peoples राजस्थान का कश्मीर कहा जाता है गोरमघाट झरना राजस्थान का मेघालय के नाम से जाना जाता है : भील बेरी झरना